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एक तरफ़ा Ek Tarfa Lyrics Hindi – King

एक तरफ़ा लिरिक्स हिंदी / Ek Tarfa Lyrics in Hindi

एक तरफ़ा लिरिक्स हिंदी / Ek Tarfa Lyrics in Hindi This Song Sung By King. And “Ek Tarfa Lyrics” Writen By King, Ek Tarfa Song Music is Given By Aakash. English Lyrics Given Below

Ek Tarfa Lyrics details

  • Song: Ek Tarfa
  • Singer: King
  • Lyrics: King
  • Music: Aakash
  • Album: Khwabeeda
  • Music Label: King

एक तरफ़ा Ek Tarfa Lyrics in Hindi

तू फिरसे पास आ
मैं ज़िद्द नहीं करूँगा
तू फिरसे दूर जा
मैं कुछ नहीं कहूँगा

जो तेरे जाने से मैं
बैठा हूँ मैखाने में
मैं खा चुका हूँ धोका
पीने से नहीं मरूँगा

जो तुझसे सीख हूँ
तुझी पे तो लिखूँगा
जो तुझे चाहूँगा
तुझी पे तो मिटूँगा

जो हँसके आऊँगा मैं
फिर से तेरे सामने
हूँ नापसंद बता दियो
मैं फिर नहीं दिखूँगा

मैंने देखा तुझमे
सादगी रही नहीं
मैंने देखा तूने
कोशिशे बोहोत करी

कहे जो तुझको अपने
हाथों से सजा दूँ
है कमी तू पहने बोहोत
फिर भी लगता क्यूँ सजी नहीं

आज भी ऐसे देखे
मैंने डायरे नहीं
के तुझसे बाँट लूँ
मैं खुदको कह दूँ
आ रहे नहीं है तुमसे मिलने

बेवफा ही थे जो
हँसके कह दिया
के हम भी धोखे
खा रहे नहीं

जो फिरसे देखा मेरी
रुक चली कलम थी
दिल धड़कता, आँखें भीगी
बातें तंग थी

जो तुझको सोचा मेरा
पूरा एक जनम थी
जब तुझको देखा
किसी और की सनम थी

दिल तो दुखता है पर
जीना पड़ता ही है
सूरज से चाँद भी
अकेले लड़ता ही है

मैं कितना भूलूँ किस्सा
तेरा अड़ता ही है
जो करदें फ़ासला तो
प्यार बढ़ता ही है

गाने तो चल रहे पर
बात तेरी मेरी है
चिराग बुझ गए
पर रातें तेरी मेरी है

हुआ वो एक ना जो
साथ जनम का वादा था
तो इस सदी में जाना क्या
औकात तेरी मेरी है

माना मैं सब ही कुछ
जीता कुछ भी हारा ना
पर जिसको हारा उसको
देखा फिर दोबारा ना

जो धस गया हूँ जाके
रेत में मैं आँखों तक
तू है समुन्दर मुझपे
बूँद का सहारा ना

ना मुझसे पूछ
मेरे हाल क्या सितारों का
ना दम तू खा ये आके
नोटों की दीवारों का

है पैसा क्या तू
छोटी बातें ना किया कर
मैं बस प्यार से गरीब
मुझको मोल ना हज़ारो का

जो मुझसे पूछ ले तू
रास्ता बहारों का
तो हँसके कह दूँ
तू नज़ारा मेरी आँखों का

मैं जिसको कोसने चला हूँ
उसका नाम याद फिर भी
लिख ना पाना दोष
काम है गवारों का

जो तुझको देखा
आसमां में चाँद था नई
कहीं पे छुप गया
के केहता लगता नहीं

इससे हसीं मैंने
देखा कहीं कुछ के लोग
यूँ ही लिखते रहते मुझपे
ए खुदा मैं चाँद नहीं

ये तेरे रेश्मी
जो बाल जालसाज़ी हैं
मरा नहीं पर
जीते जी तू मेरी फ़ांसी है

दबा नहीं गला क्यों
साँसे मेरी घुट रही
मैं क्या ही दूँ सज़ा
जा तेरी हर सज़ा ही माफ़ी है

मुझे खबर नहीं
तू किस जुबान में राज़ी है
दिखे असर नहीं
तू किस दुआ में बाकी है

अगर कभी मैं
तेरे सामने से गुज़रूँ
मुझको मिल तू या नहीं
पर तेरी एक नज़र ही काफी है

एक तरफ़ा मैं
नाम भी बना लूँगा
एक तरफ़ा मैं
नाम भी छुपा लूँगा

एक अरसा जो बीते
तेरी यादो में
मैं होके मशहूर
तुझपे ज़िंदगी लुटा दूँगा

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